प्रोटीन क्या है?
Protein प्रोटीन मुखत: है कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, और, नाइट्रोजन तत्व के सम्मिलन से बना एक एक संकीर्ण पदार्थ है। यह बनस्पति जगत तथा जंतु जगत दोनों से ही प्राप्त भोजन पदार्थ मैं होता है।
यह सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व है क्योंकि इसी से शरीर की कोशिकाओं का निर्माण होता है। शरीर में उपस्थित कुल प्रोटीन [ Protein ] का 75% भाग जीवित प्रोटीन तथा शेष 25% प्रोटीन विराट रूप में पाया जाता है।
जीवित प्रोटीन के रूप में मांस पेशियों, ऊतको, अस्थियों, उपास्थियों, त्वचा, ऊतकों द्रव्यों ; जैसे – रक्त लसीका आदि तथा मृत रूप में बालों, नाखूनों, हार्मोन तथा कुछ एंजाइम के रूप में पाई जाती है।
प्रोटीन के प्रकार एवं प्राप्ति के स्रोत –
प्रोटीन वनस्पतिक जंतुजन्य दो प्रकार की होती है-
1.वानस्पतिक प्रोटीन-
यह प्रोटीन हमें पेड़ पौधों, वनस्पति, ड्राई फ्रूट्स, तथा अनाजों से प्राप्त होता है।
गेहूं, चना, बाजरा, चावल, मक्का, मटर, काजू, बादाम, पिस्ता, सोयाबीन, सब्जी, दाले, सेम, मूंगफली, तिलहन आदि से प्राप्त होता है|
2. जंतु प्रोटीन-
विभिन्न जंतुओं के मांस, अंडा, मछली, दूध तथा दूध से बने पदार्थ से प्राप्त होती है। जंतुओं से प्राप्त प्रोटीन, वनस्पतिक जगत की अपेक्षा अधिक सरलता से पचती है| जंतु प्रोटीन हमारे लिए अधिक लाभदायक भी होता है।
प्रोटीन के कार्य-
- प्रोटीन शारीरिक निर्माण, विकास में वृद्धि के लिए आवश्यक है। यह बढ़ते बच्चों, खिलाड़ियों, गर्भवती स्त्री तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अति आवश्यक है|
- शारीरिक कार्यों के लिए शक्ति प्रदान करना तथा मानसिक शक्ति के विकास में सहयोगी है।
- प्रोटीन शरीर में विभिन्न पाचक रसों का निर्माण करता है यह रस कुछ इस प्रकार है जैसे जठर रस, पाचन राज तथा और अन्य प्रकार के एंजॉय इन सभी का निर्माण भी इसी से होता है।
- यह रक्त में उपस्थित हिमोग्लोबिन के निर्माण में सहायक है। उपस्थित प्रोटीन फाइब्रिनोजेन के रूप में पाई जाती है जो रक्त का थक्का जमने में सहयोगी होती है|
- प्रतिफल चलने वाली विभिन्न जैविक क्रियाएं के लिए आवश्यक है।
- हड्डियों को मजबूत बनाने तथा दांतो के क्षय को भी रोकता है। दांतों का झरना, गिरना यह सब भी प्रोटीन की कमी के कारण होने वाले रोग हैं इसीलिए हमें अपने शरीर में इसकी मात्रा को कभी भी कम नहीं होने देना चाहिए अन्यथा बड़े बुरे परिणाम मिल सकते हैं।
- प्रोटीन शरीर में ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ाता है जिसे रोग प्रतिरोधक का का विकास होता है।
- शरीर में बसा व कार्बोहाइड्रेट की अनुपस्थिति में प्रोटीन ही ऊर्जा प्रदान करता है।
- यह बालों को घना, चमकीला व रेशमी बनाता है। अगर आपके बाल टूट रहे हैं या झड़ रहे हैं तो यह आपके शरीर में प्रोटीन की कमी को दर्शाता है। आपको तुरंत अपने भोजन में प्रोटीन से भरपूर पदार्थों का सेवन शुरू कर देना चाहिए।
- प्रोटीन का मुख्य कार्य टूटे-फूटे ऊतकों की मरम्मत करना तथा नए ऊतकों का निर्माण वृद्धि करना है।
प्रोटीन की कमी से हानियां [ प्रोटीन की कमी से बीमारी ]
किसी भी पोषक तत्व की शरीर में कम कुपोषण कहलाती है| प्रोटीन के कुपोषण से निम्न हानियां होती हैं।
- इसकी कमी से नई कोशिकाओं का निर्माण बाधित होता है जिससे शारीरिक व मानसिक विकास अवरुद्ध हो जाता है। गर्भावस्था के दौरान बच्चों में बुद्धि का विकास और शारीरिक क्षमता भी इसी से निर्धारित होती है।
- गर्भ के अंदर शिशु का पूर्ण विकास नहीं हो पाता है कई बार बच्चा अपंग पैदा होता है या उसके शरीर में कोई सा अंग कम विकसित होता है यह एक बहुत ज्यादा खतरनाक बीमारी है।
- स्तनपान कराने वाली माताओं को उचित मात्रा में दूध नहीं होता है जिससे बच्चा कमजोर बे अल्पविकसित रह जाता है। अगर आपको ऐसा लगे कि किसी महिला को दूध नहीं उतर रहा है तो आपको समझ जाना चाहिए कि यह किस कमी के कारण हुआ है। आपको उस गर्भवती महिला के खानपान में कुछ बदलाव करने की जरूरत है।
- इसकी कमी से विशेषकर बच्चों को मेरेस्मस नामक रोग हो जाता है, जिससे बच्चों की हड्डियों का विकास ठीक से नहीं होता टांगे टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं मानसिक विकास रूक जाता है तथा मांसपेशियों में थकावट रहती है।
- शरीर के भार में कमी, यकृत का बढ़ जाना, उसकी कोशिका में पानी का भर जाना, जिससे यकृत व अन्य अंगो पर सूजन आ जाती है।
- बच्चों के बाल रूखे होकर झड़ने लगते हैं अतिसार, रक्त हीनता तथा आंखों के नीचे काले धब्बे पड़ने लगते हैं। इसके साथ-साथ दृष्टि का दुँधलापन भी देखने को मिलता है।
- त्वचा शुष्क, रुखी, खुरदरी, चकत्तेदार हो जाती है| बाल दो मुहँ, भूरे, चमक हिन होकर जाने लगते हैं।
- शारीरिक व मानसिक कमजोरियों का अनुभव होता है मांसपेशियों में थकान रहती है।
- व्यक्ति जल्दी-जल्दी रोग ग्रस्त होता है पाचन क्रिया व अन्य क्रियाये अनियमित हो जाती है।
- मांसपेशियों तथा त्वचा में से वसा का क्षय होने लगता है जिससे कम उम्र में भी व्यक्ति बुढा लगने लगता है।
- महिलाओं में विशेषकर एमिनिया हो जाती है क्योंकि इसकी कमी से रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है।
प्रोटीन की अधिकता से होने वाली हानियां- [ प्रोटीन की अधिकता से बीमारी ]
किसी भी पोषक तत्व की कमी के साथ-साथ उस की अधिकता से भी व्यक्ति को हानि होती है प्रोटीन की अधिकता से निर्णय हानियां होती है|
1.प्रोटीन की अधिकता से कब्ज रहने लगता है| क्योंकि प्रोटीन गरिष्ठ होता है इससे पाचक अंगो को अधिक कार्य करना पड़ता है जिससे कम समय में ही पाचक नग शिथिल होने लगते हैं|
2.भारत जैसे गर्म देश में प्रोटीन की अधिकता से शरीर में अधिक ऊर्जा उत्पन्न हो जाती है जिससे फोड़े फुंसी तथा कभी-कभी लाल दाने भी हो जाते हैं|
3.इसके अधिकता कामेच्छा में वृद्धि करती है|
प्रोटीन की दैनिक आवश्यकता – [ प्रोटीन चार्ट ]
भारत ने वातावरण को ध्यान में रखते हुए प्रतिदिन निम्न मात्रा अनुसार प्रोटीन की आवश्यकता होती है:
आयु वर्ग | प्रोटीन की आवश्यक मात्रा |
---|---|
1 से 3 वर्ष के शिशु | 22 g/d |
4 से 6 वर्ष के लिए | 30 g/d |
7 से 9 वर्ष के लिए | 41 g/d |
10 से 12 वर्ष के लिए | 54 g/d |
13 से 15 वर्ष के लिए | 70 g/d |
16 से 18 वर्ष की लड़कियों के लिए | 63 g/d |
16 से 18 वर्ष के लड़कों के लिए | 78 g/d |
व्यस्क पुरुषों के लिए | 60 g/d |
व्यस्क स्त्रियों के लिए | 50 g/d |
गर्भवती स्त्रियों के लिए | 65 g/d |
प्रोटीन का पाचन-
प्रोटीन कुछ मात्रा का पाचन आमाशय में तथा पूर्णत: है। पाचन छोटी आत में होता है। यह सूक्ष्म कणों में विभाजित होती है और छोटी आँत द्वारा अवशोषित कर ली जाती है।